खानकाह-ए-मौला
भारत में मस्जिदों की समृद्ध विरासत में श्रीनगर शहर की 'खानकाह-ए-मौला' एक विशिष्ट स्थान रखती है। यह ऐतिहासिक इमारत न केवल एक पूजास्थल है, बल्कि इस्लामी वास्तुकला, कश्मीरी संस्कृति और सूफी परंपराओं का एक अद्भुत संगम भी प्रस्तुत करती है। झेलम नदी के तट पर स्थित यह खानकाह, जिसे शाह-ए-हमदान मस्जिद के नाम से भी जाना जाता है, अपनी लकड़ी की नक्काशीदार संरचना और आध्यात्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है, जो इसे भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे पुरानी और सब
[hostal_shortcode titulo="खानकाह-ए-मौला" direccion="On the banks of Jehlum river and near to, Zaina Kadal - Maharak Ganj Rd, Shamswari, Srinagar, Jammu and Kashmir 190002" imagen_url="https://nearmei.in/wp-content/uploads/2026/02/external_image_994_1772111822.jpg" rating="4.8/5"]खानकाह-ए-मौला का ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक महत्व अतुलनीय है। झेलम नदी के तट पर, ज़ैना कादल - महारख़ गंज सड़क के निकट स्थित यह स्थल स्थापत्य कला का एक उत्कृष्ट नमूना प्रस्तुत करता है, जो शांति और आध्यात्मिक अनुभव की तलाश में आने वाले पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं के लिए एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र है। इसकी रणनीतिक स्थिति श्रीनगर में सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ एक स्थायी आर्थिक लाभ का अवसर प्रदान करती है।
| बुधवार | 5:30am–9pm |
| गुरुवार | 9am–5pm |
| शुक्रवार | 5:30am–9pm |
| शनिवार | 5:30am–5pm |
| रविवार | 9am–9pm |
| सोमवार | 5:30am–9pm |
| मंगलवार | 5:30am–9pm |
अधिक जानकारी
खानकाह-ए-मौला मस्जिद का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व क्या है?
यह मस्जिद, जिसे शाह-ए-हमदान मस्जिद के नाम से भी जाना जाता है, जम्मू-कश्मीर की सबसे पुरानी मस्जिद मानी जाती है और इसका निर्माण 1395 ई. में सुल्तान सिकंदर के शासनकाल में हज़रत सैयद अली हमदानी की स्मृति में किया गया था। यह स्थान न केवल इस्लामिक वास्तुकला का एक उत्कृष्ट नमूना है, बल्कि कश्मीर में इस्लाम के प्रसार का एक केंद्रीय केंद्र भी रहा है, जो इसे एक गहरा ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व प्रदान करता है।
खानकाह-ए-मौला की वास्तुकला की क्या विशेषताएं हैं?
इस मस्जिद की वास्तुकला कश्मीरी लकड़ी की नक्काशी और फारसी प्रभावों का एक अनूठा मिश्रण प्रस्तुत करती है, जिसमें लकड़ी के खंभे, घंटी के आकार के स्तंभ और एक पिरामिडनुमा छत शामिल हैं। इमारत झेलम नदी के तट पर स्थित है, जो इसके मनोरम दृश्य को और बढ़ाती है। इसकी सजावट में सूक्ष्म रूप से उकेरी गई पेपियर-माशे की कलाकृति और हस्तनिर्मित कालीन शामिल हैं, जो इसकी कलात्मक विरासत को उजागर करते हैं।
खानकाह-ए-मौला कहाँ स्थित है और वहाँ कैसे पहुँचा जा सकता है?
खानकाह-ए-मौला मस्जिद श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर में झेलम नदी के तट पर, ज़ैना कादल - महारक गंज रोड, शमस्वारी के नज़दीक स्थित है, जिसका पता 190002 है। यह शहर के मध्य भाग में आसानी से पहुँच योग्य है और श्रीनगर हवाई अड्डे या शहर के मुख्य बस अड्डे से स्थानीय टैक्सी या ऑटो-रिक्शा द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है।
खानकाह-ए-मौला का आगंतुक अनुभव और रेटिंग क्या है?
आगंतुक इस स्थान को शांतिपूर्ण और आध्यात्मिक वातावरण के लिए बेहद सराहते हैं, जो प्रार्थना और चिंतन के लिए आदर्श है। 4.8 की उच्च रेटिंग इसकी सुंदर वास्तुकला, समृद्ध इतिहास और अच्छी तरह से संरक्षित स्थिति को दर्शाती है। यह स्थान धार्मिक यात्रियों और पर्यटकों दोनों के लिए समान रूप से आकर्षण का केंद्र है,
