मस्जिद उल इस्लाम - सुन्नी हनफी

भारत में मस्जिदें सांस्कृतिक विविधता और धार्मिक सद्भाव का प्रतीक रही हैं, जहाँ हर मस्जिद का अपना एक विशिष्ट इतिहास और स्थापत्य शैली है। ऐसी ही एक ऐतिहासिक मस्जिद है जमशेदपुर स्थित 'मस्जिद उल इस्लाम - सुन्नी हनफी', जो केवल शहर के मुस्लिम समुदाय के लिए एक प्रमुख धार्मिक केंद्र है, बल्कि सुन्नी हनफी मत के अनुयायियों की आस्था का केंद्रबिंदु भी है। यह मस्जिद भारत की बहुलवादी संस्कृति में इस्लाम की समृद्ध परंपरा का एक जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करती है।

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मस्जिद उल इस्लाम - सुन्नी हनफी जमशेदपुर के कबीर नगर इलाके में स्थित एक शांत और आध्यात्मिक केंद्र है। यह मस्जिद स्थानीय मुस्लिम समुदाय, विशेष रूप से हनफी मान्यताओं का पालन करने वालों के लिए, नमाज़ और धार्मिक सभाओं का एक प्रमुख स्थल है। इसका शांतिपूर्ण वातावरण प्रार्थना में गहन एकाग्रता प्रदान करता है, जबकि इसका केंद्रीय स्थान (आर5क्यूडब्ल्यू+6आर8, इस्लामनगर) इसे निवासियों के लिए सुलभ बनाता है। यह न केवल धार्मिक अनुष्ठानों का स्थान है, बल्कि सामुदायिक जुड़ाव और धार्मिक शिक्षा का भी एक केंद्र है, जो शहर के सामाजिक-धार्मिक ताने-बाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

बुधवार9am–10pm
गुरुवार9am–10pm
शुक्रवार10am–12pm
शनिवार9am–10pm
रविवार9–10am
सोमवार9–10am
मंगलवार9–10am
विषय सूची

अधिक जानकारी

मस्जिद उल इस्लाम - सुन्नी हनफी की स्थापना कब और कहाँ हुई थी?

यह मस्जिद भारत के झारखंड राज्य के जमशेदपुर शहर में स्थित है, जो विशेष रूप से इस्लामनगर, कबीर नगर, कपाली इलाके में R5QW+6R8 पते पर मौजूद है। यह सुन्नी हनफी मस्जिद समुदाय के लिए एक आध्यात्मिक केंद्र के रूप में स्थापित की गई थी और शहर के मुसलमानों की धार्मिक ज़रूरतों को पूरा करती है।

मस्जिद उल इस्लाम में किस प्रकार की धार्मिक गतिविधियाँ आयोजित होती हैं?

यहाँ पर सुन्नी हनफी मत के अनुसार सभी प्रमुख धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें रोज़ाना की पाँचों नमाज़, जुमा की नमाज़, रमज़ान के तरावीह और ईद की नमाज़ शामिल हैं। मस्जिद धार्मिक शिक्षा और इस्लामिक सिद्धांतों के प्रचार-प्रसार पर भी विशेष ध्यान देती है।

मस्जिद उल इस्लाम की समुदाय में क्या भूमिका है?

मस्जिद उल इस्लाम सिर्फ़ एक इबादतगाह ही नहीं, बल्कि जमशेदपुर के इस्लामनगर क्षेत्र में एक सामाजिक केंद्र की भूमिका भी निभाती है। यह स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोगों को एक साथ जोड़ती है, सामाजिक कल्याण के कार्यक्रम चलाती है और आपसी भाईचारे व सद्भाव को मज़बूत करने का काम करती है।

मस्जिद उल इस्लाम लोगों द्वारा कैसे रेटेड है?

इस मस्जिद को समुदाय के लोगों द्वारा काफ़ी सराहा जाता है, जिसकी पुष्टि इसके 4.5 के उच्च रेटिंग से होती है। यह रेटिंग मस्जिद की साफ़-सफाई, प्रबंधन, धार्मिक वातावरण और सभी आगंतुकों के प्रति सहयोगात्मक रवैये के कारण मिली है, जो इसे विशेष बनाता है।