Sunni Masjid سنی مسجد

नासिक शहर में स्थित सुन्नी मस्जिद भारत की धार्मिक विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह मस्जिद केवल स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण इबादतगाह है, बल्कि शहर के ऐतिहासिक और स्थापत्य परिदृश्य का एक अभिन्न अंग भी है। भारत में मस्जिदों की समृद्ध परंपरा के अंतर्गत, यह ऐतिहासिक इमारत सद्भाव और साझा विरासत की मिसाल पेश करती है, जो अपने आर्किटेक्चरल डिजाइन और सामाजिक-धार्मिक महत्व के माध्यम से देश की बहुलवादी पहचान को दर्श

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यह सुन्नी मस्जिद (XQWR+5W5, करंजा के सामने, चौक मंडई, महालक्ष्मी चाल, नाशिक में स्थित) एक प्रमुख धार्मिक केंद्र है जो स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लिए प्रार्थना, सामाजिक एकता और शिक्षा का आधार प्रदान करती है। इसका केंद्रीय स्थान और शांत वातावरण इसे नियमित इबादत और सामुदायिक सभाओं के लिए एक आदर्श स्थल बनाता है, जिससे यह क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक एवं धार्मिक भूमिका निभाती है।

विषय सूची

अधिक जानकारी

भारत में सुन्नी मस्जिद क्या है और इनकी क्या पहचान है?

भारत में सुन्नी मस्जिद वे मस्जिदें हैं जो इस्लाम की सुन्नी परंपरा का पालन करती हैं और यहाँ हनफी मत के अनुयायी प्रमुखता से इबादत करते हैं। इनकी पहचान अक्सर स्थापत्य शैली में मुग़ल या भारतीय-इस्लामिक डिजाइन, एक विशाल प्रार्थना हॉल (मुसल्ला) और एक या अधिक मीनारों से होती है, जैसे कि नासिक, महाराष्ट्र में स्थित प्रसिद्ध मस्जिद

क्या सुन्नी मस्जिद में गैर-मुस्लिम प्रवेश कर सकते हैं?

हाँ, आम तौर पर गैर-मुस्लिम भी सुन्नी मस्जिद में प्रवेश कर सकते हैं, बशर्ते वे शालीनता और सम्मानपूर्ण ड्रेस कोड का पालन करें, प्रार्थना में व्यवधान न डालें और जूतों को निर्धारित स्थान पर उतार दें। हालाँकि, प्रवेश से पहले स्थानीय प्रबंधन या ट्रस्ट से अनुमति लेना और प्रार्थना के समय बचना उचित रहता है।

सुन्नी मस्जिद का प्रशासन और रखरखाव कौन करता है?

भारत में अधिकांश सुन्नी मस्जिदों का प्रशासन और रखरखाव एक स्थानीय ट्रस्ट या मस्जिद कमेटी द्वारा किया जाता है, जिसमें समुदाय के सम्मानित सदस्य शामिल होते हैं। ये कमेटी दान (चंदा और ज़कात), संपत्ति के किराये और सरकारी अनुदान (यदि लागू हो) से प्राप्त निधियों से मस्जिद के रखरखाव, मरम्मत और दैनिक कार्यों का प्रबंधन करती है।

मस्जिद में 5 दैनिक नमाज़ का समय कैसे निर्धारित होता है?

मस्जिद में 5 दैनिक नमाज़ (फज्र, ज़ुहर, असर, मग़रिब, ईशा) का समय सूर्य की स्थिति के आधार पर निर्धारित होता है और यह स्थान व मौसम के अनुसार बदलता रहता है। अधिकांश मस्जिदों में समय सारणी प्रदर्शित की जाती है, और आजकल मोबाइल ऐप्स या स्थानीय कैलेंडर भी इसकी सटीक जानकारी देते हैं। नमाज़ की अज़ान मस्जिद की मीनार से दी जाती है, जो समय की घोषणा करती है।