मदीना मस्जिद, झालूपारा शिलांग
भारत में मस्जिदों की विरासत सांस्कृतिक एवं धार्मिक सद्भाव का प्रतीक रही है, जहाँ हर मस्जिद का अपना एक अनूठा इतिहास और स्थापत्य शैली है। इसी कड़ी में शिलांग शहर के झालूपारा क्षेत्र में स्थित मदीना मस्जिद एक महत्वपूर्ण स्थल है, जो न केवल स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लिए आस्था का केंद्र है बल्कि शिलांग की बहुलतावादी पहचान को भी दर्शाती है। यह मस्जिद सादगी और भव्यता के सुंदर संगम के साथ शहर के परिदृश्य में धार्मिक सद्भाव की मिसाल प्रस्तुत करती है।
[hostal_shortcode titulo="मदीना मस्जिद, झालूपारा शिलांग" direccion="69 Jb Cantt, Jhalupara, Shillong, Meghalaya 793002, भारत" imagen_url="https://nearmei.in/wp-content/uploads/2026/02/external_image_2317_1772073853.jpg" rating="4.6/5"]मदीना मस्जिद, झालूपारा शिलांग (69 Jb Cantt, Jhalुपारा) एक प्रमुख धार्मिक केंद्र है जो स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लिए प्रार्थना, सामुदायिक जुड़ाव और शिक्षा का स्तंभ प्रदान करता है। इसकी केंद्रीय स्थिति और शांत वातावरण इसे आध्यात्मिक साधना के लिए एक आदर्श स्थल बनाते हैं, जो नियमित नमाज़ और धार्मिक समारोहों के माध्यम से सामाजिक एकता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह संस्थान सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करते हुए एक सहिष्णु और समावेशी समाज के निर्माण में योगदान देता है।
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अधिक जानकारी
मदीना मस्जिद, झालूपारा शिलांग कहाँ स्थित है?
यह मस्जिद शिलांग, मेघालय में 69 जेबी कैंट, झालूपारा के पते पर स्थित है, जो भारत के पूर्वोत्तर राज्य में एक महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र है और स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लिए एक प्रमुख इबादतगाह के रूप में कार्य करती है।
क्या यह मस्जिद पर्यटकों के लिए खुली है?
हाँ, यह मस्जिद आमतौर पर सभी आगंतुकों के लिए खुली रहती है, हालाँकि प्रार्थना के समय का सम्मान करना और उचित वेशभूषा का पालन करना महत्वपूर्ण है, साथ ही शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रबंधन से अनुमति लेना उचित रहता है।
इस मस्जिद की क्या विशेषता है?
इसकी मुख्य विशेषता इसका स्थापत्य और शिलांग की हरी-भरी पहाड़ियों के बीच एक शांत स्थान पर स्थित होना है, जो आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है और इसकी 4.6 की उच्च रेटिंग स्थानीय लोगों व आगंतुकों दोनों में इसकी लोकप्रियता व स्वच्छता को दर्शाती है।
क्या यहाँ गैर-मुस्लिम भी जा सकते हैं?
जी हाँ, गैर-मुस्लिम आगंतुक भी सामान्यतः इस मस्जिद में जा सकते हैं, बशर्ते वे धार्मिक भावनाओं का सम्मान करें, नियमों का पालन करें और शांति व सद्भाव के वातावरण को बनाए रखने में योगदान दें, जो भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता को प्रतिबिंबित करता है।
