सुल्तान-ए-मेवाड़ क़ुत्बे आलम सैय्यद ख़्वाजा मोहम्मद अब्दुर्रऊफ़ - मस्तान बाबा अलैहिर्रहमा दरगाह
भारत में मस्जिदें केवल इबादतगाह ही नहीं, बल्कि देश की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर का प्रतीक भी हैं। उदयपुर शहर की 'सुल्तान-ए-मेवाड़ क़ुत्बे आलम सैय्यद ख़्वाजा मोहम्मद अब्दुर्रऊफ़ - मस्तान बाबा अलैहिर्रहमा दरगाह' इसी विरासत का एक अद्भुत उदाहरण है, जहाँ एक सूफी संत की दरगाह और एक मस्जिद का अद्वितीय सामंजस्य देखने को मिलता है। यह स्थान न सिर्फ़ धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि भारतीय समाज में सद्भाव और साझा संस्कृ
[hostal_shortcode titulo="सुल्तान-ए-मेवाड़ क़ुत्बे आलम सैय्यद ख़्वाजा मोहम्मद अब्दुर्रऊफ़ - मस्तान बाबा अलैहिर्रहमा दरगाह" direccion="HMQ6+9M3, मल्ला तलाई, उदयपुर, राजस्थान 313004, भारत" imagen_url="https://nearmei.in/wp-content/uploads/2026/02/external_image_2111_1772075137.jpg" telefono="+91 294 243 2500" rating="4.7/5"]सुल्तान-ए-मेवाड़ क़ुत्बे आलम सैय्यद ख़्वाजा मोहम्मद अब्दुर्रऊफ़ - मस्तान बाबा अलैहिर्रहमा दरगाह (HMQ6+9M3, मल्ला तलाई, उदयपुर) एक प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र है जो सभी समुदायों के श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। इसका प्राथमिक लाभ यहाँ आने वाले भक्तों को मिलने वाली अनूठी आध्यात्मिक शांति और आशीर्वाद का अनुभव है। दरगाह का सांस्कृतिक महत्व और सद्भाव का वातावरण इसे केवल एक धार्मिक स्थल से कहीं अधिक बनाता है, जो उदयपुर में पर्यटन और सामुदायिक एकता को भी बढ़ावा देता है। संपर्क सूत्र (+91 294 243 2500) होने से यात्रा की योजना बनाना सुविधाजनक है।
| बुधवार | 11:16am–10:10pm |
| गुरुवार | 11:16am–10:10pm |
| शुक्रवार | 11:16am–10:10pm |
| शनिवार | 11:16am–10:10pm |
| रविवार | 11:16am–10:10pm |
| सोमवार | 11:16am–10:10pm |
| मंगलवार | 11:16am–10:10pm |
अधिक जानकारी
दरगाह के परिसर में मस्जिद का क्या महत्व है?
दरगाह परिसर में स्थित मस्जिद, जिसे अक्सर दरगाह शरीफ की मस्जिद कहा जाता है, आध्यात्मिक साधना और इबादत का केंद्र है। यहाँ आने वाले जायरीन नमाज़ अदा करते हैं और सैय्यद ख़्वाजा मोहम्मद अब्दुर्रऊफ़ मस्तान बाबा की दरगाह पर फ़ातिहा पढ़ने से पहले इस मस्जिद में श्रद्धा से कुछ पल बिताते हैं, जो इस स्थान की सांप्रदायिक एकता और सूफ़ी परंपरा को दर्शाता है।
मस्जिद और दरगाह की वास्तुकला किस शैली को दर्शाती है?
इस पवित्र स्थल की वास्तुकला राजस्थानी इस्लामिक शैली का एक अनूठा उदाहरण है, जहाँ सफेद संगमरमर और स्थानीय पत्थर का उपयोग किया गया है। गुंबद और मीनारों में राजपूत वास्तुकला की झलक स्पष्ट देखी जा सकती है, जो उदयपुर क्षेत्र की स्थापत्य परंपरा के साथ इस्लामिक डिजाइन का सुंदर समन्वय प्रस्तुत करती है।
दरगाह परिसर में मस्जिद जाने का समय और नियम क्या हैं?
दरगाह और मस्जिद सभी धर्मों के लोगों के लिए खुली है, हालाँकि नमाज़ के समय का विशेष ध्यान रखना चाहिए। सुबह और शाम की नमाज़ के दौरान जायरीन श्रद्धापूर्वक भाग ले सकते हैं या प्रार्थना में शांति से बैठ सकते हैं। मल्ला तलाई, उदयपुर में स्थित इस स्थल पर महिलाओं के लिए भी उचित वस्त्र पहनकर जाने का नियम है ताकि पवित्रता बनी रहे।
यह मस्जिद और दरगाह सामाजिक सद्भाव में कैसे योगदान देती है?
सैय्यद ख़्वाजा मोहम्मद अब्दुर्रऊफ़ मस्तान बाबा की दरगाह और उसकी मस्जिद सूफ़ीवाद की साझा विरासत का प्रतीक है, जहाँ हर धर्म और समुदाय के लोग आशीर्वाद लेते हैं। यह स्थान धार्मिक सद्भाव का एक जीवंत उदाहरण है, जिसकी 4.7 की उच्च रेटिंग इसकी लोकप्रियता और श्रद्धालुओं की अटूट आस्था को प्रमाणित करती है।
